Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
कवतुकवाणें । बोलों बोबडएा वचनें ॥1॥ हें तों नसावें अंतरीं । आह्मां धरायाचें दुरी ॥ध्रु.॥ स्तुति तैसी निंदा । माना सम चि गोविंदा ॥2॥ तुका ह्मणे बोलें । मज तुह्मी शिकविलें॥3॥
Tuka 1812
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