Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
या चि नांवें दोष । राहे अंतरीं कििल्मष ॥1॥ मना अंगीं पुण्य पाप । शुभ उत्तम संकल्प ॥ध्रु.॥ बिजाऐसीं फळें । उत्तम कां अमंगळें ॥2॥ तुका ह्मणे चित्त । शुद्ध करावें हे नित ॥3॥
Tuka 1460
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