Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
मरणा हातीं सुटली काया । विचारें या निश्चयें ॥1॥ नासोनियां गेली खंती । सहजिस्थति भोगाचे ॥ध्रु.॥ न देखें सें जालें श्रम । आलें वर्म हाता हें ॥2॥ तुका ह्मणे कैची कींव । कोठें जीव निराळा ॥3॥
Tuka 1361
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