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Tukaram Abhangs (Gatha)

तुकाराम गाथा

मूल श्लोकः

तों च हीं क्षुल्लकें सखीं सहोदरें । नाहीं विश्वंभरें वोळखी तों ॥1॥ नारायण विश्वंभर विश्वपिता । प्रमाण तो होतां सकळ मिथ्या ॥ध्रु.॥ रवि नुगवे तों दीपिकाचें काज । प्रकाशें तें तेज सहज लोपे ॥2॥ तुका ह्मणे देहसंबंध संचितें । कारण निरुतें नारायणीं ॥3॥

Tuka 1310

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