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Tukaram Abhangs (Gatha)

तुकाराम गाथा

मूल श्लोकः

बारंबार काहे मरत अभागी । बहुरि मरन संक्या तोरेभागी ॥ध्रु.॥ ये हि तन करते क्या ना होय । भजन भगति करे वैकुंठे जाय ॥1॥ रामनाम मोल नहिं वेचे कबरि । वो हि सब माया छुरावत झगरी ॥2॥ कहे तुका मनसुं मिल राखो । रामरस जिव्हा नित्य चाखो ॥3॥

Tuka 1166

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