Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
रामभजन सब सार मिठाइऩ । हरि संताप जनमदुख राइऩ ॥ध्रु.॥ दुधभात घृत सकरपारे । हरते भुक नहि अंततारे ॥1॥ खावते जुग सब चलिजावे । खटमिठा फिर पचतावे ॥2॥ कहे तुका रामरस जो पावे । बहुरि फेरा वो कबहु न खावे ॥3॥
Tuka 1165
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