Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
देखत आखों झुटा कोरा । तो काहे छोरा घरंबार ॥ध्रु.॥ मनसुं किया चाहिये पाख । उपर खाक पसारा ॥1॥ कामक्रोधसो संसार । वो सिरभार चलावे ॥2॥ कहे तुका वो संन्यास। छोडे आस तनकी हि ॥3॥
Tuka 1164
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