Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
काहे भुला धनसंपत्तीघोर । रामराम सुन गाउ हो बाप रे ॥ध्रु.॥ राजे लोक सब कहे तूं आपना । जब काल नहीं पाया ठाना ॥1॥ माया मिथ्या मनका सब धंदा । तजो अभिमान भजो गोविंदा ॥2॥ राना रंग डोंगरकी राइऩ । कहे तुका करे इलाहि ॥3॥
Tuka 1161
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