Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
जग चले उस घाट कोन जाय । नहिं समजत फिरफिर गोदे खाय ॥ध्रु.॥ नहिं एकदो सकल संसार । जो बुझे सो आगला स्वार ॥1॥ उपर श्वार बैठे कृष्णांपीठ । नहिं बाचे कोइ जावे लूठ ॥2॥ देख हि डर फेर बैठा तुका । जोवत मारग राम हि एका ॥3॥
Tuka 1157
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