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Tukaram Abhangs (Gatha)

तुकाराम गाथा

मूल श्लोकः

आपे तरे त्याकी कोण बराइऩ । औरनकुं भलो नाम घराइऩ ॥ध्रु.॥ काहे भूमि इतना भार राखे । दुभत धेनु नहिं दुध चाखे ॥1॥ बरसतें मेघ फलतेंहें बिरखा । कोन काम अपनी उन्होति रखा ॥2॥ काहे चंदा सुरज खावे फेरा । खिन एक बैठन पावत घेरा ॥3॥ काहे परिस कंचन करे धातु । नहिं मोल तुटत पावत घातु ॥4॥ कहे तुका उपकार हि काज । सब कररहिया रघुराज ॥5॥

Tuka 1156

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