Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
कब मरूं पाऊं चरन तुम्हारे । ठाकुर मेरे जीवन प्यारे ॥1॥ जग रडे ज्याकुं सो मोहि मीठा । मीठा दर आनंदमाहि पैठा ॥ध्रु.॥ भला पाऊं जनम इऩhहे बेर । बस मायाके असंग फेर ॥2॥ कहे तुका धन मानहि दारा । वोहिलिये गुंडलीयें पसारा ॥3॥
Tuka 1152
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