Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
क्या कहुं नहीं बुझत लोका । लिजावे जम मारत धका ॥1॥ क्या जीवनेकी पकडी आस । हातों लिया नहिं तेरा घांस ॥ध्रु.॥ किसे दिवाने कहता मेरा । कछु जावे तन तूं सब ल्या न्यारा ॥2॥ कहे तुका तूं भया दिवाना । आपना विचार कर ले जाना ॥3॥
Tuka 1151
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