Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
हरिसुं मिल दे एक हि बेर । पाछे तूं फिर नावे घर ॥1॥ मात सुनो दुति आवे मनावन । जाया करति भर जोबन ॥ध्रु.॥ हरिसुख मोहि कहिया न जाये । तव तूं बुझे आगोपाये ॥2॥ देखहि भाव कछु पकरि हात । मिलाइ तुका प्रभुसात ॥3॥
Tuka 1150
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