Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
मंत्रयंत्र नहिं मानत साखी । प्रेमभाव नहिं अंतर राखी ॥1॥ राम कहे त्याके पगहूं लागूं । देखत कपट अमिमान दुर भागूं ॥ध्रु.॥ अधिक याती कुलहीन नहिं ज्यानु । ज्याणे नारायन सो प्राणी मानूं ॥2॥ कहे तुका जीव तन डारू वारी । राम उपासिंहु बलियारी ॥3॥
Tuka 1148
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