Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
छोडे धन मंदिर बन बसाया । मांगत टूका घरघर खाया ॥1॥ तीनसों हम करवों सलाम । ज्या मुखें बैठा राजाराम ॥ध्रु.॥ तुलसीमाला बभूत चहावे । हरजीके गुण निर्मल गावे ॥2॥ कहे तुका जो साइप हमारा । हिरनकश्यप उन्हें मारहि डारा ॥3॥
Tuka 1147
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