Tukaram Abhangs (Gatha)
तुकाराम गाथा
मूल श्लोकः
क्या गाऊं कोइऩ सुननवाला । देखें तों सब जग ही भुला ॥1॥ खेलों आपणे राम इसातें । जैसी वैसी करहों मात ॥ध्रु.॥ काहांसे ल्यावों माधर वाणी । रीझे ऐसी लोक बिराणी ॥2॥ गिरिधर लाल तो भावहि भुका । राग कला नहिं जानत तुका ॥3॥
Tuka 1146
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