नाना भाँति सुमंगल साजे। हरषि नगर निसान बहु बाजे।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नाना भाँति सुमंगल साजे। हरषि नगर निसान बहु बाजे।।
RCM 7.9.4
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नाना भाँति सुमंगल साजे। हरषि नगर निसान बहु बाजे।।
RCM 7.9.4
नाना भाँति सुमंगल साजे। हरषि नगर निसान बहु बाजे।।