नाना भाँति निछावरि करहीं। परमानंद हरष उर भरहीं।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नाना भाँति निछावरि करहीं। परमानंद हरष उर भरहीं।।
RCM 7.7.5
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नाना भाँति निछावरि करहीं। परमानंद हरष उर भरहीं।।
RCM 7.7.5
नाना भाँति निछावरि करहीं। परमानंद हरष उर भरहीं।।