देहिं असीस बूझि कुसलाता। होइ अचल तुम्हार अहिवाता।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
देहिं असीस बूझि कुसलाता। होइ अचल तुम्हार अहिवाता।।
RCM 7.7.2
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
देहिं असीस बूझि कुसलाता। होइ अचल तुम्हार अहिवाता।।
RCM 7.7.2
देहिं असीस बूझि कुसलाता। होइ अचल तुम्हार अहिवाता।।