भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे।।
RCM 7.6.1
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे।।
RCM 7.6.1
भरतानुज लछिमन पुनि भेंटे। दुसह बिरह संभव दुख मेटे।।