भरि भरि हेम थार भामिनी। गावत चलिं सिंधु सिंधुरगामिनी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
भरि भरि हेम थार भामिनी। गावत चलिं सिंधु सिंधुरगामिनी।।
RCM 7.3.6
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
भरि भरि हेम थार भामिनी। गावत चलिं सिंधु सिंधुरगामिनी।।
RCM 7.3.6
भरि भरि हेम थार भामिनी। गावत चलिं सिंधु सिंधुरगामिनी।।