सुनत सकल जननीं उठि धाईं। कहि प्रभु कुसल भरत समुझाई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनत सकल जननीं उठि धाईं। कहि प्रभु कुसल भरत समुझाई।।
RCM 7.3.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनत सकल जननीं उठि धाईं। कहि प्रभु कुसल भरत समुझाई।।
RCM 7.3.3
सुनत सकल जननीं उठि धाईं। कहि प्रभु कुसल भरत समुझाई।।