बार बार बूझी कुसलाता। तो कहुँ देउँ काह सुनु भ्राता।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बार बार बूझी कुसलाता। तो कहुँ देउँ काह सुनु भ्राता।।
RCM 7.2.12
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बार बार बूझी कुसलाता। तो कहुँ देउँ काह सुनु भ्राता।।
RCM 7.2.12
बार बार बूझी कुसलाता। तो कहुँ देउँ काह सुनु भ्राता।।