जासु बिरहँ सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पाँती।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जासु बिरहँ सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पाँती।।
RCM 7.2.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जासु बिरहँ सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पाँती।।
RCM 7.2.3
जासु बिरहँ सोचहु दिन राती। रटहु निरंतर गुन गन पाँती।।