जन अवगुन प्रभु मान न काऊ। दीन बंधु अति मृदुल सुभाऊ।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जन अवगुन प्रभु मान न काऊ। दीन बंधु अति मृदुल सुभाऊ।।
RCM 7.1.6
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जन अवगुन प्रभु मान न काऊ। दीन बंधु अति मृदुल सुभाऊ।।
RCM 7.1.6
जन अवगुन प्रभु मान न काऊ। दीन बंधु अति मृदुल सुभाऊ।।