सपनें जेहि सन होइ लराई। जागें समुझत मन सकुचाई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सपनें जेहि सन होइ लराई। जागें समुझत मन सकुचाई।।
RCM 4.7.20
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सपनें जेहि सन होइ लराई। जागें समुझत मन सकुचाई।।
RCM 4.7.20
सपनें जेहि सन होइ लराई। जागें समुझत मन सकुचाई।।