आगें कह मृदु बचन बनाई। पाछें अनहित मन कुटिलाई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
आगें कह मृदु बचन बनाई। पाछें अनहित मन कुटिलाई।।
RCM 4.7.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
आगें कह मृदु बचन बनाई। पाछें अनहित मन कुटिलाई।।
RCM 4.7.7
आगें कह मृदु बचन बनाई। पाछें अनहित मन कुटिलाई।।