देत लेत मन संक न धरई। बल अनुमान सदा हित करई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
देत लेत मन संक न धरई। बल अनुमान सदा हित करई।।
RCM 4.7.5
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
देत लेत मन संक न धरई। बल अनुमान सदा हित करई।।
RCM 4.7.5
देत लेत मन संक न धरई। बल अनुमान सदा हित करई।।