जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी।।
RCM 4.7.1
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी।।
RCM 4.7.1
जे न मित्र दुख होहिं दुखारी। तिन्हहि बिलोकत पातक भारी।।