सुनि सेवक दुख दीनदयाला। फरकि उठीं द्वै भुजा बिसाला।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनि सेवक दुख दीनदयाला। फरकि उठीं द्वै भुजा बिसाला।।
RCM 4.6.14
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनि सेवक दुख दीनदयाला। फरकि उठीं द्वै भुजा बिसाला।।
RCM 4.6.14
सुनि सेवक दुख दीनदयाला। फरकि उठीं द्वै भुजा बिसाला।।