इहाँ साप बस आवत नाहीं। तदपि सभीत रहउँ मन माहीं।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
इहाँ साप बस आवत नाहीं। तदपि सभीत रहउँ मन माहीं।।
RCM 4.6.13
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
इहाँ साप बस आवत नाहीं। तदपि सभीत रहउँ मन माहीं।।
RCM 4.6.13
इहाँ साप बस आवत नाहीं। तदपि सभीत रहउँ मन माहीं।।