बालि ताहि मारि गृह आवा। देखि मोहि जियँ भेद बढ़ावा।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बालि ताहि मारि गृह आवा। देखि मोहि जियँ भेद बढ़ावा।।
RCM 4.6.10
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बालि ताहि मारि गृह आवा। देखि मोहि जियँ भेद बढ़ावा।।
RCM 4.6.10
बालि ताहि मारि गृह आवा। देखि मोहि जियँ भेद बढ़ावा।।