नात बालि अरु मैं द्वौ भाई। प्रीति रही कछु बरनि न जाई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नात बालि अरु मैं द्वौ भाई। प्रीति रही कछु बरनि न जाई।।
RCM 4.6.1
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नात बालि अरु मैं द्वौ भाई। प्रीति रही कछु बरनि न जाई।।
RCM 4.6.1
नात बालि अरु मैं द्वौ भाई। प्रीति रही कछु बरनि न जाई।।