कीन्ही प्रीति कछु बीच न राखा। लछमिन राम चरित सब भाषा।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
कीन्ही प्रीति कछु बीच न राखा। लछमिन राम चरित सब भाषा।।
RCM 4.5.1
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
कीन्ही प्रीति कछु बीच न राखा। लछमिन राम चरित सब भाषा।।
RCM 4.5.1
कीन्ही प्रीति कछु बीच न राखा। लछमिन राम चरित सब भाषा।।