ता पर मैं रघुबीर दोहाई। जानउँ नहिं कछु भजन उपाई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
ता पर मैं रघुबीर दोहाई। जानउँ नहिं कछु भजन उपाई।।
RCM 4.3.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
ता पर मैं रघुबीर दोहाई। जानउँ नहिं कछु भजन उपाई।।
RCM 4.3.3
ता पर मैं रघुबीर दोहाई। जानउँ नहिं कछु भजन उपाई।।