Mirabai Padas (Padavali + individual pads)
मीराबाई पदावली
मूल श्लोकः
जागो बंसी वारे जागो मोरे ललन। रजनी बीती भोर भयो है घर घर खुले किवारे। गोपी दही मथत सुनियत है कंगना के झनकारे। उठो लालजी भोर भयो है सुर नर ठाढ़े द्वारे । ग्वाल बाल सब करत कोलाहल जय जय सबद उचारे । मीरा के प्रभु गिरधर नागर शरण आया कूं तारे ॥
Mira 1.87
Audio
Translations & commentaries(0)
No translations available for this verse yet.