Mirabai Padas (Padavali + individual pads)
मीराबाई पदावली
मूल श्लोकः
चालो अगमके देस कास देखत डरै। वहां भरा प्रेम का हौज हंस केल्यां करै॥ ओढ़ण लज्जा चीर धीरज कों घांघरो। छिमता कांकण हाथ सुमत को मूंदरो॥ दिल दुलड़ी दरियाव सांचको दोवडो। उबटण गुरुको ग्यान ध्यान को धोवणो॥ कान अखोटा ग्यान जुगतको झोंटणो। बेसर हरिको नाम चूड़ो चित ऊजणो॥ पूंची है बिसवास काजल है धरमकी। दातां इम्रत रेख दयाको बोलणो॥ जौहर सील संतोष निरतको घूंघरो। बिंदली गज और हार तिलक हरि-प्रेम रो॥ सज सोला सिणगार पहरि सोने राखड़ीं। सांवलियांसूं प्रीति औरासूं आखड़ी॥ पतिबरता की सेज प्रभुजी पधारिया। गावै दासि कर राखिया॥
Mira 1.70
Audio
Translations & commentaries(0)
No translations available for this verse yet.