Mirabai Padas (Padavali + individual pads)
मीराबाई पदावली
मूल श्लोकः
स्याम! मने चाकर राखो जी गिरधारी लाला! चाकर राखो जी। चाकर रहसूं बाग लगासूं नित उठ दरसण पासूं। ब्रिंदाबन की कुंजगलिन में तेरी लीला गासूं।। चाकरी में दरसण पाऊँ सुमिरण पाऊँ खरची। भाव भगति जागीरी पाऊँ, तीनूं बाता सरसी।। मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, गल बैजंती माला। ब्रिंदाबन में धेनु चरावे मोहन मुरलीवाला।। हरे हरे नित बाग लगाऊँ, बिच बिच राखूं क्यारी। सांवरिया के दरसण पाऊँ, पहर कुसुम्मी सारी। जोगी आया जोग करणकूं, तप करणे संन्यासी। हरी भजनकूं साधू आया ब्रिंदाबन के बासी।। मीरा के प्रभु गहिर गंभीरा सदा रहो जी धीरा। आधी रात प्रभु दरसन दीन्हें, प्रेमनदी के तीरा।।
Mira 1.68
Audio
Translations & commentaries(0)
No translations available for this verse yet.