Mirabai Padas (Padavali + individual pads)
मीराबाई पदावली
मूल श्लोकः
चरन रज महिमा मैं जानी। याहि चरनसे गंगा प्रगटी। भगिरथ कुल तारी॥ चरण०॥१॥ याहि चरनसे बिप्र सुदामा। हरि कंचन धाम दिन्ही॥ च०॥२॥ याहि चरनसे अहिल्या उधारी। गौतम घरकी पट्टरानी॥ च०॥३॥ मीराके प्रभु गिरिधर नागर। चरनकमल से लटपटानी॥ चरण०॥४॥
Mira 1.67
Audio
Translations & commentaries(0)
No translations available for this verse yet.