Mirabai Padas (Padavali + individual pads)
मीराबाई पदावली
मूल श्लोकः
घर आंगण न सुहावै, पिया बिन मोहि न भावै॥ दीपक जोय कहा करूं सजनी, पिय परदेस रहावै। सूनी सेज जहर ज्यूं लागे, सिसक-सिसक जिय जावै॥ नैण निंदरा नहीं आवै॥ कदकी उभी मैं मग जोऊं, निस-दिन बिरह सतावै। कहा कहूं कछु कहत न आवै, हिवड़ो अति उकलावै॥ हरि कब दरस दिखावै॥ ऐसो है कोई परम सनेही, तुरत सनेसो लावै। वा बिरियां कद होसी मुझको, हरि हंस कंठ लगावै॥ मीरा मिलि होरी गावै॥
Mira 1.65
Audio
Translations & commentaries(0)
No translations available for this verse yet.