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Mirabai Padas (Padavali + individual pads)

मीराबाई पदावली

मूल श्लोकः

कोई कहियौ रे प्रभु आवन की, आवनकी मनभावन की। आप न आवै लिख नहिं भेजै , बाण पड़ी ललचावन की। ए दोउ नैण कह्यो नहिं मानै, नदियां बहै जैसे सावन की। कहा करूं कछु नहिं बस मेरो, पांख नहीं उड़ जावनकी। मीरा कहै प्रभु कब रे मिलोगे, चेरी भै हूँ तेरे दांवन की।

Mira 1.53

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