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Mirabai Padas (Padavali + individual pads)

मीराबाई पदावली

मूल श्लोकः

कृष्णमंदिरमों नाचे तो ताल मृदंग रंग चटकी। पावमों घुंगरू झुमझुम वाजे। तो ताल राखो घुंगटकी॥१॥ नाथ तुम जान है सब घटका मीरा भक्ति करे पर घटकी॥ध्रु०॥ ध्यान धरे मीरा फेर सरनकुं सेवा करे झटपटको। सालीग्रामकूं तीलक बनायो भाल तिलक बीज टबकी॥२॥ बीख कटोरा राजाजीने भेजो तो संटसंग मीरा हटकी। ले चरणामृत पी गईं मीरा जैसी शीशी अमृतकी॥३॥ घरमेंसे एक दारा चली शीरपर घागर और मटकी। मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। जैसी डेरी तटवरकी॥४॥

Mira 1.51

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