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Mirabai Padas (Padavali + individual pads)

मीराबाई पदावली

मूल श्लोकः

करुणा सुणो स्याम मेरी, मैं तो होय रही चेरी तेरी॥ दरसण कारण भई बावरी बिरह-बिथा तन घेरी। तेरे कारण जोगण हूंगी, दूंगी नग्र बिच फेरी॥ कुंज बन हेरी-हेरी॥ अंग भभूत गले मृगछाला, यो तप भसम करूं री। अजहुं न मिल्या राम अबिनासी बन-बन बीच फिरूं री॥ रोऊं नित टेरी-टेरी॥ जन मीरा कूं गिरधर मिलिया दुख मेटण सुख भेरी। रूम रूम साता भइ उर में, मिट गई फेरा-फेरी॥ रहूं चरननि तर चेरी॥

Mira 1.31

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