Mirabai Padas (Padavali + individual pads)
मीराबाई पदावली
मूल श्लोकः
बन जाऊं चरणकी दासी रे, दासी मैं भई उदासी॥ध्रु०॥ और देव कोई न जाणूं। हरिबिन भई उदासी॥१॥ नहीं न्हावूं गंगा नहीं न्हावूं जमुना। नहीं न्हावूं प्रयाग कासी॥२॥ मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर। चरनकमलकी प्यासी॥३॥
Mira 1.144
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