Mirabai Padas (Padavali + individual pads)
मीराबाई पदावली
मूल श्लोकः
बड़े घर ताली लागी रे, म्हारां मन री उणारथ भागी रे॥ छालरिये म्हारो चित नहीं रे, डाबरिये कुण जाव। गंगा जमना सूं काम नहीं रे, मैंतो जाय मिलूं दरियाव॥ हाल्यां मोल्यांसूं काम नहीं रे, सीख नहीं सिरदार। कामदारासूं काम नहीं रे, मैं तो जाब करूं दरबार॥ काच कथीरसूं काम नहीं रे, लोहा चढ़े सिर भार। सोना रूपासूं काम नहीं रे, म्हारे हीरांरो बौपार॥ भाग हमारो जागियो रे, भयो समंद सूं सीर। अम्रित प्याला छांडिके, कुण पीवे कड़वो नीर॥ पीपाकूं प्रभु परचो दियो रे, दीन्हा खजाना पूर। मीरा के प्रभु गिरघर नागर, धणी मिल्या छै हजूर॥
Mira 1.143
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