Mirabai Padas (Padavali + individual pads)
मीराबाई पदावली
मूल श्लोकः
पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरू, किरपा कर अपनायो॥ जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो। खरच न खूटै चोर न लूटै, दिन-दिन बढ़त सवायो॥ सत की नाँव खेवटिया सतगुरू, भवसागर तर आयो। 'मीरा' के प्रभु गिरिधर नागर, हरख-हरख जस पायो॥
Mira 1.124
Audio
Translations & commentaries(0)
No translations available for this verse yet.