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Mirabai Padas (Padavali + individual pads)

मीराबाई पदावली

मूल श्लोकः

हे री मैं तो प्रेम दिवानी, मेरो दरद न जाणै कोय। सूली ऊपर सेज हमारी सोवण किस विध होय। गगन मंडल पर सेज पिया की किस विध मिलणा होय। घायलकी गत घायल जाणै जो कोई घायल होय। जौहरि की गति जौहरी जाणै दूजा न जाणै कोय। दरद की मारी बन-बन डोलूँ बैद मिल्या नहिं कोय। मीराँ की प्रभु पीर मिटे जब बैद साँवलिया होय।

Mira 1.108

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