Mirabai Padas (Padavali + individual pads)
मीराबाई पदावली
मूल श्लोकः
आओ मनमोहना जी जोऊं थांरी बाट। खान पान मोहि नैक न भावै नैणन लगे कपाट॥ तुम आयां बिन सुख नहिं मेरे दिल में बहोत उचाट। मीरा कहै मैं बई रावरी, छांड़ो नाहिं निराट॥ आओ सहेल्हां रली करां है पर घर गवण निवारि॥ झूठा माणिक मोतिया री झूठी जगमग जोति। झूठा आभूषण री, सांची पियाजी री प्रीति॥ झूठा पाट पटंबरा रे, झूठा दिखडणी चीर। सांची पियाजी री गूदड़ी, जामें निरमल रहे सरीर॥ छपन भोग बुहाय देहे इण भोगन में दाग। लूण अलूणो ही भलो है अपणे पियाजीरो साग॥ देखि बिराणे निवांणकूं है क्यूं उपजावे खीज। कालर अपणो ही भलो है, जामें निपजै चीज॥ छैल बिराणो लाखको है अपणे काज न होय। ताके संग सीधारतां है भला न कहसी कोय॥ बर हीणो अपणो भलो है कोढी कुष्टी कोय। जाके संग सीधारतां है भला कहै सब लोय॥ अबिनासीसूं बालबा हे जिनसूं सांची प्रीत। मीरा कूं प्रभुजी मिल्या है ए ही भगतिकी रीत॥
Mira 1.10
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