सम्पूर्ण विश्व के कर्ता परमात्मा की गति अगम्य है हे जीव? तू अपनी शक्ति के अनुसार ही उसको खोजने के लिए चल। धीरे-धीरे चलते रहने पर भी किसी न किसी दिन तो उसके दर्शन हो ही जाएँगे।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
करता की गति अगम है, तूँ चलि अपणै उनमान। धीरैं धीरैं पाव दे, पहुँचैंगे परवान॥
Kabir 8.4
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
ईश्वर का दर्शन एक दिन में नहीं होगा प्रयास करने पर कभी न कभी होई जायेगा।
Padārtha — Word-meaning
उनमान = मार्ग। पखान, ब्रह्म प्राप्ति।