जो ब्रह्म इतना रहस्यमय है रे मन! उसके वर्णन का प्रयास तू न कर। उस रहस्य को रहस्य ही बना रहने दें। वेद और कुरानादि धार्मिक ग्रन्थ जिसके गुणों का वर्णन नहीं कर सके उसका वर्णन कैसे किया जा सकता है और करने पर भी उसका विश्वास कौन करेगा?
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
ऐसा अद्भुत जिनि क्थौ, अद्भुत राखि लुकाइ। वेद कुरानौ गमि नहीं, वह्या न को पतियाइ॥
Kabir 8.3
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
ईश्वर के रूप का वर्णन वेद और कुरान ऐसे धार्मिक ग्रंथ भी नहीं कर पाते हैं फिर और कौन कर सकता है?
Padārtha — Word-meaning
जिनि = मत। गमि = पहुँच।